हापुड़ : अगर आप बाजार से मावा, पनीर और इनसे बनी मिठाइयां खरीदकर बेफिक्र होकर खा रहे हैं, तो सतर्क होने की जरूरत है। हापुड़ में खाद्य पदार्थों की जांच से जुड़े आंकड़ों ने मिलावटखोरी की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। पिछले एक वर्ष में जांच के लिए भेजे गए पनीर के 48 नमूनों में से 28 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें चार नमूनों को असुरक्षित और 24 को सब-स्टैंडर्ड पाया गया। हापुड़ से बड़ी मात्रा में मावा और पनीर NCR के विभिन्न इलाकों तक पहुंचने की बात सामने आती रही है। आरोप और आशंकाएं हैं कि मिलावटी या मानकों के अनुरूप न होने वाले उत्पाद दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद समेत आसपास के बाजारों तक पहुंच सकते हैं।
जिले के कई गांवों में मावा और पनीर के उत्पादन व कारोबार की जानकारी के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन सीएस मिश्र के अनुसार, पिछले एक साल में हापुड़ जिले से पनीर के 48 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें 28 नमूने फेल पाए गए। चार नमूनों को असुरक्षित घोषित किया गया, जबकि 24 नमूने सब-स्टैंडर्ड पाए गए, जिनमें फैट की मात्रा निर्धारित मानकों से कम थी। इसी तरह खोया के 13 नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से सात नमूने फेल पाए गए। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए भी लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
सैंपल फेल होने के बाद कुछ प्रतिष्ठानों के पंजीकरण रद्द किए गए हैं और दो इकाइयों का काम बंद कराया गया है, जबकि अन्य मामलों की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कपिल गौतम ने मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। उनके अनुसार, लंबे समय तक हानिकारक मिलावटी पदार्थों का सेवन शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। लीवर और किडनी पर असर पड़ने के साथ गंभीर मामलों में कई अंगों के काम करने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा हो सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कथित रूप से सिंथेटिक मावा तैयार करने में यदि डिटर्जेंट, यूरिया या अन्य हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है तो इससे फूड प्वाइजनिंग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के संपर्क को कुछ बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से भी जोड़ा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि उपभोक्ता विश्वसनीय दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें और गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित विभाग से शिकायत करें। जहां संभव हो, घर पर तैयार किया गया ताजा पनीर और अन्य खाद्य पदार्थ इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

